प्रयागराज: नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार “आपदा जनित अवसाद में संवाद एवं मीडिया की भूमिका” विषय पर बोलते हुए दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, चेन्नई के कुलपति प्रोफेसर राम मोहन पाठक ने कहा कि श्वास और स्वास्थ्य के लिए संवाद जरूरी है, संवाद के बगैर व्यक्ति अवसाद ग्रस्त हो जाता है। हमारे देश में पुरातन काल से ही ऋषि मुनियों की एकांतवास की परंपरा रही है, आज हम अपनी पुरातन पद्धति को अपनाकर कोरोना वायरस जैसी महामारी को मात दे सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि स्वास्थ के लिए संवाद जरूरी है। वेबिनार में बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार डॉक्टर सचिन शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि सोशल मीडिया संभावनाओं से भरा स्पेस है किंतु हमें इस बात का ध्यान रखना पड़ेगा कि हम फेक न्यूज़ और वास्तविक न्यूज़ में अंतर कर पाएं इसके लिए सिटीजन जर्नलिस्ट की भूमिका अहम हो जाती है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मीडिया स्ट्डीज के कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ० धनंजय चोपड़ा ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज भी एक मीडिया है यदि समाज आधुनिक संचार तंत्र का समझदारी से उपयोग करे तो मुख्यधारा की मीडिया में आई विकृतियों को कम किया जा सकता है। मनोविज्ञान के एसो० प्रोफेसर डॉ० जगदीश सिंह दीक्षित ने आपदा एवं अवसाद का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया। कुलाधिपति जे०एन० मिश्र ने अपने उद्बोधन में फ्री, फेयर एंड फियरलेश जर्नलिज्म की बात पर बल दिया।

नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एस०सी० तिवारी ने मीडिया के विकासात्मक और सकारात्मक पक्ष पर जोर दिया। वेबिनार का संयोजन एवं संचालन पंकज कुमार यादव ने तथा धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव आर० एल० विश्वकर्मा ने किया। इस वेबिनार में बड़ी संख्या में छात्रों,शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने प्रतिभागिता की।

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