प्रयागराज: अब अदालत में अभियोजन का पक्ष प्राइवेट अधिवक्ता से कराने से पहले अदालत से अनुमति प्राप्त करनी होगी। बिना अदालत की अनुमति के प्राइवेट अधिवक्ता पक्ष नहीं रख सकता है। अभियोजन का पक्ष रखने का अधिकार सिर्फ शासकीय अधिवक्ता या अपर शासकीय अधिवक्ता को ही है। एक सत्र विचारण में न्यायालय के समक्ष उठे इस प्रश्न का अदालत ने उपरोक्त निर्णय देते हुए समाधान किया।

राज्य सरकार बनाम दुर्गा कामले के केस में फास्ट ट्रैक कोर्ट जज ज्ञानेंद्र पांडेय के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता दयाशंकर मिश्र ने तर्क दिया कि इस मुकदमे में अभियोजन की ओर से प्राइवेट अधिवक्ता द्वारा बहस की जा रही है, जो मान्य नहीं है क्योंकि अभियोजन का पक्ष रखने के लिए सिर्फ सरकारी वकील ही अधिकृत हैं। धारीवाल इंडस्ट्रीज के मामले में सुप्रीमकोर्ट ने भी यही निर्णय दिया है।

मामले के अनुसार शहर के रेड लाइट एरिया से सेक्स वर्करों को हटाने और उन पर दर्ज मुकदमे की सुनवाई चल रही है। इस मामले में एक पक्षकार समाजसेवी संस्था गुड़िया भी है। गुड़िया संस्था ने अपना वकील नियुक्त किया है जो अदालत में अभियोजन की ओर से पक्ष रख रहे थे। इस पर बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आपत्ति करते हुए कहा कि संस्था न तो पक्षकार और न ही पीड़ित है। इसलिए उसके वकील को पक्ष रखने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए गुड़िया संस्था के वकील को बहस करने से रोक दिया है।