प्रयागराज: घूरपुर में ऐतिहासिक एवं पौराणिक विरासत भीटा के यमुना नदी के बीचो बीच स्थित सुजावनदेव मंदिर स्थित है|सुजावनदेव मंदिर के प्राकृतिक दृश्य बहुत ही अजूबा है, यह मंदिर यमुना नदी के बीचों-बीच 100 फुट ऊंचे टीले के ऊपर स्थित है| इस मंदिर की भव्यता और विशालता बहुत ही अद्भुत है|

सुजावन देव धाम में दीपावली के अवसर पर प्रसिद्ध यम द्वितीया का मेला भी लगता है। यहां दूर-दूर से लोग आकर भगवान शिव की आराधना करके मनौती मानते हैं। इस मेले के आयोजन के लिए भीटा, घूरपुर में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बैठक की। सर्वसम्मति से तय हुआ कि आगामी यम द्वितीया मेले की शुरुआत सुजावन देव लोक उत्सव से होगी।

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम अपने वनवास के समय यहां पहुंचे थे और उन्होंने यहां मौजूद भगवान शिव की आराधना की थी| मां सीता की रसोई भी यहां था जो वर्तमान में यमुना नदी में समा चुका है| पद्म माधव मंदिर जनपद की यमुनापार इलाके में लगभग 22 किलोमीटर दूर घूरपुर के बीटा पहाड़ी के समीप स्थित है| जब यमुना की जलधारा परिवर्तित हुई है, तभी यह मंदिर यमुना के बीच में आ गया| वीकर देवरिया ग्राम के पास स्थित शिव मंदिर का वर्णन कर्म पुराण में मिलता है| ऐसी मान्यता है कि चित्रकूट जा कर पूजा पाठ करके सभी पूर्व माना जाता है बाबा का दर्शन किया जाए|

इतिहासकार का मत है कि मंदिर के आसपास के मौजूद पत्थर से आभास मिलता है की यह तीसरी शताब्दी का अत्यंत प्रसिद्ध मंदिर है यही का प्राचीन पाटलिपुत्र से यहां आते थे|

यह मंदिर बहुत ही प्राचीन ऐसा माना जाता है कि यहां यमराज की बहन जमुना जी से मिलने यमराज यहां आए थे और यमुना जी के आदर सत्कार से खुश होकर उन्होंने वरदान मांगने को कहा| यमुना जी ने वरदान मांगा कि मेरे तट पर जो भी व्यक्ति अपनी बहन के साथ उपासना करेगा उसे मृत का भय नहीं रहेगा|

यहां लगने वाला मेला बहुत ही विशाल तथा स्थानीय लोगों में काफी लोकप्रिय मेला 3 दिन तक चलता है| यह भैया दूज से शुरू होकर 3 दिन तक चलता है| यह मेला और इस मंदिर की सुंदरता लोगों को खूब लुभाती है| यहां गर्मी हो या सर्दी या फिर बरसात यहां भक्तों का ताता लगा रहता है| इसके अलावा भीटा की पहाड़ी बालीवुड को भी आकृष्‍ट करती है। यहां कई फिल्‍मों की शूटिंग भी हो चुकी है।

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