प्रयागराज: संगम नगरी में एक ऐसा मंदिर है जहाँ मान्यता है कि यहां दर्शन-पूजन, जलाभिषेक करने से श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण होती है। यमुना नदी के किनारे स्थित मनकामेश्वर मंदिर में भगवान शिव अपने विविध रूपों में विराजमान हैं। इस मंदिर का पुराणों में भी उल्लेख मिलता है। साल भर यहां पर शिव के दर्शन-पूजन को श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। सावन मास में तो यहां पर भारी भीड़ उमड़ती है जिनमें शहर के साथ दूर-दराज से भी भारी संख्या में शिवभक्त जलाभिषेक को आते हैं।

मंदिर परिसर में मनकामेश्वर शिव के अलावा सिद्धेश्वर और ऋणमुक्तेश्वर महादेव के शिवलिंग भी विराजमान हैं। रुद्रावतार कहे जाने वाले बजरंगबली की दक्षिणमुखी मूर्ति भी यहां पर है। भैरव, यक्ष और किन्नर भी यहां पर विराजमान हैं। धार्मिक मान्यता है कि जहां पर शिव विराजमान होते हैं वहां पर माता पार्वती का भी वास होता है। ऐसे में यहां पर दोनों के दर्शन का लाभ श्रद्धालुओं को प्राप्त होता है।

स्कंद पुराण और पदम पुराण में कामेश्वर पीठ का वर्णन है, यह वही कामेश्वर धाम है, काम को भस्म करके भगवान शिव स्वयं यहां पर विराजमान हुए हैं। बताया कि त्रेता काल में भगवान श्रीराम वनवास जाते वक्त भ्राता लक्ष्मण और माता सीता के साथ प्रयाग में रुके थे और अक्षयवट के नीचे विश्राम किया था। आगे जाने के पहले प्रभु राम ने भी यहां शिव का पूजन और जलाभिषेक कर अपने मार्ग में आने वाली तमाम विघ्न-बाधाओं को दूर करने की कामना की थी।

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