प्रयागराज: यूँ तो प्रयागराज की कई चीजें पूरी दुनिया में मशहूर है| चाहे वह राजनीतिक क्षेत्र हो या साहित्यिक| ऐसे में खाने के मामले में प्रयागराज कैसे पीछे रहा सकता है| इसी क्रम में आज आपको प्रयागराज के मशहूर देहाती रसगुल्ला के बारे में बताते है| शहर का देहाती रसगुल्ला ऐसा है जिसे काटने या चबाने की तो जरूरत नहीं होती, वह मुंह में रखते ही खुद ही घुल जाता है। दुकान की ओर से गुजरने पर तो लोग रसगुल्ला खाना नहीं भूलते।

सोरांव के ग्राम बारी बरबोली के रहने वाले रामसेवक यादव ऊर्फ देहाती ने साल 1984 में बैरहना रेलवे डॉट पुल के बीच महात्मा गांधी मार्ग पर एक छोटी से दुकान में रसगुल्ला बनाकर बेचने लगे। रामसेवक को लोग देहाती के नाम से पुकारते थे सो उनकी दुकान का नाम देहाती रसगुल्ला वाला पड़ गया। देहाती रसगुल्ला शहर भर में इतना मशहूर हुआ कि सड़क पटरी पर खड़े होकर खाने के चलते जाम लगने लगा।

सन् 2012 में रामसेवक की मौत के बाद उनके तीनों लड़कों विजय, अजय, अमित दुकान को संभालने लगे। जाम की समस्या के चलते 2017 में मधवापुर सब्जी मंडी में दूसरी दुकान खोल ली| हालांकि पुरानी दुकान भी अभी चल रही है।

मधवापुर सब्जी मंडी वाली दुकान के संचालक विजय यादव ने बताया कि देहाती रसगुल्ला बनाने में किसी भी प्रकार के पाउडर का इस्तेमाल न करके केवल शुद्ध खोवे और मैदा का प्रयोग बनाया जाता है| रामसेवक यादव ने वर्ष 1984 के आसपास दुकान की शुरूआत की थी तो दो रुपये पीस रसगुल्ला बेचते थे, वर्तमान में देहाती का रसगुल्ला 15 रुपये प्रति पीस मिलता है। रसगुल्ला घर ले जाने के लिए मिट्टी की बनी मटकी में पैक करके देते हैं। विजय का कहना है कि महंगाई के चलते पैकिंग चार्ज लेने विचार कर रहे हैं जो बहुत ही कम होगा।

ये है खास बात

अप्रैल से लेकर जून माह तक दिनों में दूध की उपलब्धता कम होने के कारण दुकान बंद रहती है। गर्मी में पर्याप्त मात्रा में खोवा नहीं मिल पाता है। ऐसे में तीन माह वे दुकान बंद कर देते हैंं। जुलाई के महीने में बारिश शुरू होने पर दूध उपलब्धता होते ही रसगुल्ला बनना शुरू होता है।

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