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कानपुर: कानपुर से करीब 60 किलोमीटर दूर घाटमपुर ब्लाक में मां कुष्मांडा देवी का लेटी हुई मुद्रा में एक भव्य मंदिर है| इस मंदिर में मां कुष्मांडा की एक पिंडी है जिससे लगातर पानी रिसता रहता है| कहते हैं कि इस पानी का सेवन करने से कई प्रकार की बीमारियों से लोगों को राहत मिलती है| पिंडी से रिसने वाला पानी आज भी लोगों के लिए रहस्य बना हुआ है कि यह आता कहा से है|

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एबीपी न्यूज़ से बातचीत में मंदिर के पुजारी परशुराम दुबे ने बताया कि मां कुष्मांडा की पिंडी की प्राचीनता की गणना करना बहुत मुश्किल है की यह कितने साल पुरानी है| उन्होंने बताया कि घाटमपुर क्षेत्र में घना जंगल था, जिसमें एक कुढ़ाहा नाम का ग्वाला गाय चराने आता था| उसकी गाय चरते चरते मां की पिंडी के पास आ जाती थी और पूरा दूध माता की पिंडी के पास निकाल देती थी| जब कुढ़ाहा शाम को घर जाता था तो उसकी गाय दूध नहीं देती थी यह क्रम कई महीनों तक चलता रहा|

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तभी कुढ़ाहा के मन यह बात आई की आज देखेंगे की यह कहां-कहां जाती है और ऐसा इसके साथ क्या होता है जो शाम को दूध नहीं देती है| कुढ़ाहा झाड़ियों के पीछे छिप कर अपनी गाय का पीछा करता रहा कुढ़ाहा ने देखा की उसकी गाय एक एक पिंडी के ऊपर गाय खड़ी है और अपने आप दूध निकल रहा है| यह देख वह बड़ा आश्चर्यचकित हो गया उसने यह बात अपने गांव में बताई| ग्रामीणों ने उस जगह पर जाकर देखा तो वहां माता की पिंडी मिली| गांव वालों ने वहां एक छोटी सी मठिया बना दी| धीरे-धीरे इस स्थान पर तमाम साधू संत भी आ कर रहने लगे और पूजा पाठ करने लगे|

पुजारी परशुराम का मानना है कि अगर सूर्योदय से पहले स्व्छ होकर कर छ माह तक कुष्मांडा मां के पिंडी से निकलने वाले पानी का सेवन किया जाए तो किसी भी बीमारी से निजात पाई जा सकती है|

मंदिर के बगल में बने तालाब का भी बड़ा आश्चर्य चकित इतिहास है मंदिर की सेवा करने वाले बुजुर्ग राजपाल सिंह के मुताबिक जब से यह माता कुष्मांडा का मंदिर बना है यह तालाब कभी सूखा नहीं | उन्होंने कहा की मेरी उम्र 68 साल है लेकिन मैंने कभी भी इस तलाब को सुखा नहीं देखा है| बारिश हो या न हो लेकिन यह तालाब सूखता नहीं है|

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