आगरा: यदि आपके पास दो परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन) हैं तो इनमें से एक तत्काल सरेंडर करा दें। ऐसा न करने की स्थिति में आयकर विभाग आप पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगा सकता है। आयकर अधिनियम 1961 की धारा 272 के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। कालेधन पर अंकुश लगाने और पैन धारकों का रिकार्ड दुरुस्त रखने के लिए पैन की जांच की जा रही है।

आयकर अधिकारी बताते हैं कि पैन एक यूनीक नंबर होता है। जिस तरह से दो लोग या दो कंपनियों के पैन समान नहीं हो सकते हैं। उसी तरह एक ही शख्स या कंपनी दो पैन नहीं रख सकते। यदि गलती से दो पैन बन गए हैं तो उसे सरेंडर करने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन किया जा सकता है। सरेंडर करने, नाम सुधार या एड्रेस चेंज जैसे बदलावों के लिए फार्म समान होते हैं।

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) की वेबसाइट पर जाकर नए पैन के लिए आवेदन करने वाले लिंक पर फॉर्म भरें। जो पैन जारी रखना चाहते हैं, उसे फॉर्म में सबसे ऊपर दर्ज करें। दूसरे पैन की जानकारी फॉर्म के कॉलम नंबर-11 में भरें। इसके अलावा जिस पैन को रद्द करवाना है, उसकी कॉपी फॉर्म के साथ लगा दें। यदि किन्हीं कारणों से पैन खो गया है या खराब हो गया है तो नया बनवाने के बजाय पुराने पैन का डुप्लीकेट बनवाएं।

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