नई दिल्ली: निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले में तीन दोषियों के मौत की सजा संबंधी दायर समीक्षा याचिका पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी दोषियों को फांसी की सजा बरक़रार रखी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि समीक्षा याचिका पर उस वक्त गौर किया जाता है जब उसमें कोई ऐसा बिंदु हो जो पहले अदालत में उठाया न गया हो या उसे नजरअंदाज किया गया हो। इस याचिका में ऐसा कुछ नहीं था, इसलिए अदालत इनकी सजा को बरकरार रखते हुए इन्हें फांसी की सजा देती है।

वहीं निर्भया की मां ने कहा कि हमारा संघर्ष का यह अंत नहीं है। न्याय में देरी होने से समाज की दूसरी बेटियां भी प्रभावित हो रही हैं। मैं न्यायपालिका से अनुरोध करती हूं कि वह न्याय व्यवस्था को दुरूस्त करें और दोषियों को जल्द से जल्द फांसी देकर निर्भया और समाज की दूसरी बेटियों और महिलाओं को न्याय दें।

उन्होंने कहा कि वह नाबालिग नहीं थे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्होंने ऐसे पाप किया। इस फैसले से न्यायपालिका पर हमारा विश्वास बढ़ा है कि हमें देर से ही सही पर न्याय जरूर मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद निर्भया के वकील रोहन महाजन ने कहा कि यह विजय के पल हैं। इस फैसले से न्यायपालिका में दोबारा सबका विश्वास कायम हुआ है। हम आज संतुष्ट हैं। अब हमारी केंद्र सरकार से सिर्फ ये विनती है कि जो भी कार्रवाई बाकी है उसे तुरंत निपटाया जाए और दोषियों को फांसी दी जाए।

मामले में मौत की सजा पाए चौथे आरोपी अक्षय कुमार सिंह (31) ने सुप्रीम कोर्ट के 5 मई 2017 के फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर नहीं की थी। आरोपी के वकील एडवोकेट एपी सिंह ने कहा कि अक्षय ने अभी याचिका दायर नहीं की है। हम इसे दायर करेंगे।

शीर्ष न्यायालय ने मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की तरफ से मौत की सजा को बरकरार रखा था। मालूम हो कि दिल्ली की 23 साल की पैरामेडिकल की छात्रा का 16 दिसंबर 2012 को गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी।

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