आगरा: धनतेरस आने वाला है| ऐसे में लोग खरीदारी और इस दिन होने वाली पूजा को लेकर तयारी शुरू कर दी| कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धन की देवी के उत्सव का प्रारंभ होने के कारण इस दिन को धनतेरस के नाम से जाना जाता है।

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धनतेरस पर पांच देवताओं, गणेश जी, मां लक्ष्मी, ब्रह्मा,विष्णु और महेश की पूजा होती है। आचार्य डा.राजनाथ झा नेबताया कि इन पांचों दिन पांच-पांच दीए जलाने से पांचों देवताओं की कृपा मिलती है। धनतेरस के अगले दिन छोटी दीपावली, हनुमान जयंती, और उसके अगले दिन दीपावली, फिर गोवर्द्धन पूजा और पांचवें दिन भैयादूज मनायी जाएगी।

धनतेरस पर यमदीप भी प्रज्वलित किया जाएगा। रोग,शोक,भय, दुर्घटना, मृत्यु से बचने के लिए धनतेरस की शाम घर के बाहर यमदीप जलाने की परंपरा है। इसी दिन धनवंतरी ने सौ तरह के मृत्यु की जानकारी के साथ अकाल मृत्यु से बचाव के लिए यमदीप जलाने की बात बतायी थी।

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इस दिन लक्ष्मी जी के स्वागत के लिए अपने घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाने के साथ ही महालक्ष्मी के दो छोटे-छोट पद चिन्ह लगाए जाते हैं। धनतेरस पर माता लक्ष्मी के अलावा धन्वंतरी,कुबेर की भी पूजा की जाती है। धनवंतरी इसी तिथि को समुद्र मंथन से अवतरित हुए थे। प्राचीन काल में लोग इस दिन नए बर्तन खरीदकर उसमें क्षीर पकवान रखकर धनवंतरी भगवान को भोग लगाते थे।

धनतेरस पर पांच देवताओं, गणेश जी, मां लक्ष्मी, ब्रह्मा,विष्णु और महेश की पूजा होती है। आचार्य डा.राजनाथ झा नेबताया कि इन पांचों दिन पांच-पांच दीए जलाने से पांचों देवताओं की कृपा मिलती है। धनतेरस के अगले दिन छोटी दीपावली, हनुमान जयंती, और उसके अगले दिन दीपावली, फिर गोवर्द्धन पूजा और पांचवें दिन भैयादूज मनायी जाएगी।

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