नई दिल्ली: कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने में दुनियाभर के वैज्ञानिक लगे हुए हैं। भारत, ब्रिटेन, रूस समेत कई देशों में डेढ़ दर्जन से ज्यादा वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल के फेज में पहुंच चुकी है। इस बीच भारतीय दवा नियामक डीजीसीआई ने पहले से उपलब्ध एक वैक्सीन को कोरोना के इलाज में इस्तेमाल करने की सशर्त अनुमति दे दी है। सांस की तकलीफ बढ़ने पर कोरोना मरीजों को यह वैक्सीन दी जा सकेगी।

ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने कोरोना वायरस के इलाज के लिए जिस ‘इटोलीजुमैब’ इंजेक्शन के सशर्त इस्तेमाल को मंजूरी दी है, उसका इस्तेमाल त्वचा से संबंधित बीमारी सोरायसिस के लिए किया जाता है। हालांकि इस वैक्सीन का इस्तेमाल डॉक्टर की विशेष निगरानी में ही किया जा सकेगा।

खबरों के मुताबिक, इस ‘इटोलीजुमैब’ इंजेक्शन का इस्तेमाल उन मरीजों पर किया जा सकेगा, जो कोरोना से संक्रमित होने के बाद मेडिकल टर्म एआरडीएस से पीड़ित हैं। इस स्थिति में मरीजों को सांस संबंधी दिक्कतें भी होती हैं।

डीजीसीआई प्रमुख डॉ. वीजी सोमानी ने इस इंजेक्शन के सशर्त इस्तेमाल की अनुमति दे दी। अब इस इंजेक्शन का इस्तेमाल कोविड-19 के मरीजों के इलाज में किया जा सकेगा। एआरडीएस के मरीजों को फेफड़े में दिक्कत होती है। इस वजह से मरीजों को सांस लेना मुश्किल हो जाता है और कई स्थिति में बहुत तेज जलन भी होती है।