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नई दिल्ली: मेडिकल और दवाइयों की दुनिया एडवांस होने के साथ साथ ही इंसान ने अपने लिए एक जानलेवा फंगस भी विकसित कर लिया| यह फंगस ब्लडस्ट्रीम में पहुंचने पर शरीर में खतरनाक इन्फेक्शन पैदा करता है। डरावनी बात यह है कि फिलहाल इसका कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। इससे भी खतरनाक बात यह है कि इससे पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी फंगस जिंदा रहता है और दूसरों के शरीर में आसानी से प्रवेश कर उन्हें भी मरीज बना सकता है।

न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मई महीने में ब्रुकलीन के माउंट सिनाई हॉस्पिटल फॉर ऐब्डॉमिनल सर्जरी में एक बुजुर्ग व्यक्ति को भर्ती किया गया था। ब्लड टेस्ट में सामने आया कि वह एक नए तरह के जीवाणु से संक्रमित है जो अभी तक जितना रहस्यमयी बना हुआ है उतना ही जानलेवा भी है। टेस्ट रिपोर्ट सामने आने के बाद डॉक्टरों ने मरीज को इन्टेन्सिव केयर यूनिट में शिफ्ट कर दिया।

कैंडिडा ऑरिस नाम का यह फंगस उन लोगों को अपनी चपेट में लेता है जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है। यह पूरी दुनिया में चुपचाप फैलता जा रहा है। पिछले पांच सालों में यह वेनेजुएला के नवजात शिशु संबंधी यूनिट और स्पेन के एक अस्पताल में फैल चुका है। फंगस के कारण एक ब्रिटिश मेडिकल सेंटर को अपनी इन्टेन्सिव केयर यूनिट तक बंद कर देनी पड़ी थी। वहीं इस फंगस ने भारत, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रिका में भी पैर जमाना शुरू कर दिए हैं।

माउंट सिनाई हॉस्पिटल में भर्ती कैंडिडा ऑरिस से पीड़ित बुजुर्ग की 90 दिन बाद मौत हो गई। टेस्ट से पता चला कि उन्हें जिस कमरे में रखा गया था वहां की हर चीज पर कैंडिडा ऑरिस मौजूद था। इसके बाद अस्पताल को रूम की सफाई के लिए स्पेशल क्लीनिंग इक्विपमेंट का इस्तेमाल करना पड़ा। उन्हें फंगस को खत्म करने के लिए सीलिंग से लेकर फ्लोर की टाइल्स तक उखाड़नी पड़ी।

सी ऑरिस पर ऐंटीफंगल मेडिकेशन का भी असर नहीं होता है। इस वजह से यह स्वास्थ्य के लिए खतरा बने उन इन्फेक्शन्स का एक नया उदाहरण बन गया है जो दवा प्रतिरोधी हैं। आसान शब्दों में कहें तो बैक्टीरिया की तरह अब फंगस भी मॉर्डन मेडिसिन के प्रति डिफेंस विकसित कर रहा है।

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