अच्युतानंद शुक्ला हत्याकांड: माफिया डॉन श्री प्रकाश शुक्ला से की जाती थी तुलना

प्रयागराज: पीसीबी हॉस्टल में गोली मारकर मौत के घाट उतारा गया अच्युतानंद उर्फ सुमित शुक्ला के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, रंगदारी जैसे गंभीर मामले में डेढ़ दर्जन मुकदमे दर्ज थे| दो मामले पुलिस पर फायरिंग करने के हैं। खास बात यह कि उस पर शहर से लेकर लखनऊ तक आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने का आरोप था। कर्नलगंज पुलिस की मानें तो 2011 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पड़ने के दौरान अच्युतानंद पर पहला मुकदमा दर्ज हुआ।

इसके बाद जरायम की दुनिया में उसने कदम रखा तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के आरोप में उस पर केस की फाइल बढ़ती गयी। पुलिस की मानें तो उस पर पहला मुकदमा रंगदारी मांगने के आरोप में दर्ज हुआ। 2012 में वह तब चर्चा में आया जब कटरा में कांस्टेबल नरेश कुमार को गोली मार दी थी। गोली लगने से नरेश घायल हुआ था और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।

2013 में छात्रनेता अजीत यादव पर हुए जानलेवा हमले के मामले में भी उसका नाम आया। इधर, शिवकुटी में पीछा कर रही पुलिस टीम पर फायरिंग करने के आरोप में भी उस पर मामला दर्ज हुआ। इसके बाद 2014 में लखनऊ में हुए डबल मर्डर में नाम आया तो सुमित के नाम से दहशत फैलने लगी। पुलिस के साथ ही इस मामले में उसकी तलाश एसटीएफ भी लगी थी। कुछ दिनों बाद ही पीसीबी हॉस्टल में छात्रों पर गोली चलाने के आरोप में उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ।

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जिसके बाद पुलिस की ओर से उसकी गिरफ्तारी पर 5000 का इनाम भी घोषित किया गया। 2016 में आखिरकार वह हत्थे चढ़ा जब एसटीएफ ने उसे वाराणसी के सारनाथ से गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने कबूल किया था कि पैसों को लेकर हुए विवाद में उसने 28 जनवरी 2014 को गोमती नगर के विशाल खंड में आशीष मिश्रा व रोहित शुक्ला को मौत के घाट उतार दिया था।

इस वक्त तक सुमित पर कुल 14 मुकदमे दर्ज हो चुके थे। इसके बाद 2017 में जार्जटाउन थाना क्षेत्र में एक युवक को जिंदा जलाने के प्रयास के आरोप में उस पर केस दर्ज हुआ। इंस्पेक्टर कर्नलगंज सत्येंद्र सिंह का कहना है कि सुमित पर लगभग डेढ़ दर्जन मुकदमे दर्ज थे।

सुमित समेत चार पर हुआ था इनाम

पिछले महीने हुए छात्रसंघ के दौरान एसएसपी की ओर से जिन चार छात्रनेताओं पर इनाम घोषित किया गया था उनमें सुमित भी शामिल था। उस पर 25 हजार का इनाम घोषित था। उसके अलावा अभिषेक माइकल, अभिषेक सिंह सोनू व एक अन्य पर इनाम हुआ था। इनमें से अभिषेक माइकल पिछले दिनों ही जेल भेजा जा चुका है।

सुमित 2012 के चुनाव में उपाध्यक्ष पद का उम्मीदवार रहा और जेल से चुनाव छात्रसंघ का चुनाव लड़ा हालाकि इस चुनाव में सुमित को जीत नही मिली थी। बता दें की सुमित शुक्ला की तुलना माफिया डॉन रहे श्री प्रकाश शुक्ला से की जाती थी।

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